हिन्दी कविता बच्चों के लिए – Bachon ki Poem in Hindi ( कविताएँ हिन्दी )

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हिन्दी कविता बच्चों के लिए ( Bachon ki Poem in Hindi )

हिन्दी कविता बच्चों के लिए - Bachon ki Poem in Hindi

1. एक खिलौना आया है

दूर किसी जादू नगरी से एक खिलौना आया है .
नंदन वन से नन्हा – नन्हा यह मृग छौना आया है ,
घर आंगन से हौले हौले ठुमक ठुमक कर चलता है .
डगमग डगमग पैरों पर वह रह रह कर कभी मचलता है .
वृन्दावन की कुञ्ज गली से श्याम सलोना आया है .
दूर किसी जादू नगरी से एक खिलौना आया है .
एक खिलौना है वह माँ का एक खिलौना भाई का .
एक खिलौना है वह प्रियजन ,परिजन गाँव गंवाई का ,
कभी रेंगता है घुटनों पर कभी उचलता है .
छोटे छोटे हाथों में वह में ,लेकर छड़ी टहलता है ,
बना हुआ है वह मनमोहन ,गोकुल के लोग लुगाई का .
एक खिलौना है वह माँ का एक खिलौना भाई का .
हँस देता तो फूल बरसते ,रो देता तो मोती झरता .
आँख मिचौनी हवा खेलती ,दुनिया लट्टू होती है .
कठपुतली सा रंग बिरंगा नाच नचाता रहता है .
चिड़िया सा वह चहक चहक कर तुतली बोली कहता है .
शोभा देख अपूर्व न किसकी ,छाती ठंडी होती है ?
हँस देता तो फूल बरसते ,रो देता तो मोती झरता .

2. उठो लाल अब आँखें खोलो – हिन्दी कविता

उठो लाल अब आँखें खोलो,
पानी लायी हूँ मुंह धो लो।
बीती रात कमल दल फूले,
उसके ऊपर भँवरे झूले।
चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे,
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में प्यारी लाली छाई,
धरती ने प्यारी छवि पाई।

भोर हुई सूरज उग आया,
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
नन्ही नन्ही किरणें आई,
फूल खिले कलियाँ मुस्काई।
इतना सुंदर समय मत खोओ,
मेरे प्यारे अब मत सोओ।

3. मैं तोता मैं तोता हरे रंग का तोता

प्यारा प्यारा होता है
हरे रंग का होता है
लाल टमाटर खाता है
तोता टें टें टें टें करता है।

ताजा फल ये खाता है
सबकी नकल खिजाता है
लम्बी उड़ान भरता है
मैना पर ये मरता है ।

ठंडा पानी पीता है
मिर्ची भी ये खाता है
बंद पिंजरे रोता है
सबका प्यारा होता है।

खोखर में ये रहता है
ऊँचे नभ में उड़ता है
सुंदर सुंदर होता है
प्यारा तोता होता है।

4. कोयल हिन्दी कविता

देखो कोयल काली है पर
मीठी है इसकी बोली।
इसने ही तो कूक कूक कर
आमों में मिश्री घोली।

कोयल कोयल सच बतलाना
क्या संदेसा लाई हो।
बहुत दिनों के बाद आज फिर
इस डाली पर आई हो।

क्या गाती हो किसे बुलाती,
बतला दो कोयल रानी।
प्यासी धरती देख माँगती
हो क्या मेघों से पानी?

कोयल यह मिठास क्या तुमने
अपनी माँ से पाई है?
माँ ने ही क्या तुमको मीठी
बोली यह सिखलाई है?

डाल डाल पर उड़ना, गाना
जिसने तुम्हें सिखाया है।
सबसे मीठे मीठे बोलो,
यह भी तुम्हें बताया है।

बहुत भली हो तुमने माँ की
बात सदा ही है मानी।
इसीलिए तो तुम कहलाती
हो सब चिड़ियों की रानी।

4. वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो 

वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !
हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !
वीर तुम बढ़े चलो

सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

5. जब सूरज जग जाता है

आँखें मलकर धीरे धीरे
सूरज जब जाग जाता हैं ,
सिर पर रखकर पाँव अँधेरा
चुपके से भाग जाता है .

हौले से मुस्कान बिखेरी
पात सुनहरे हो जाते ,
डाली – डाली फुदक – फुदककर
सारे पंछी हैं गाते .

थाल भरे मोती ले करके
धरती स्वागत करती है ,
नटखट किरणें वन – उपवन में
खूब चौकड़ी भरती हैं .

कल – कल बहती हुई नदी में
सूरज खूब नहाता है ,
कभी तैरता है लहरों पर
डुबकी कभी लगाता है .

पर्वत – घाटी पार करे
मैदानों में चलता है ,
दिनभर चलकर थक जाता
सांझ हुए फिर ढलता है .

नींद उतरती आँखों में
फिर सोने चल देता हैं ,
हमें उजाला दे करकेकभी नहीं कुछ देता हैं.

6. हम नन्हे नन्हे बच्चे हैं – हिन्दी कविता

हम नन्हे नन्हे बच्चे हैं,
नादान उमर के कच्चे हैं,
हम नन्हे नन्हे बच्चे हैं
पर अपनी धुन के सच्चे हैं.
जननी की जय जय गाएँगे,
भारत की ध्वजा उड़ाएँगे.

अपना पथ कभी न छोड़ेंगे,
अपना प्रण कभी न तोड़ेंगे,
हिम्मत से नाता जोड़ेंगे.
हम हिमगिरि पर चढ़ जाएँगे,
भारत की ध्वजा उड़ाएँगे.

हम भय से कभी न डोलेंगे,
अपनी ताकत को तोलेंगे,
जननी की जय जय बोलेंगे .
अपना सिर भेंट चढ़ाएंगे ,
भारत की ध्वजा उड़ाएँगे.

हिन्दी कविता बच्चों के लिए

 

 

 

 

 

 

7. मेरा नया बचपन कविता

बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी।
गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥

चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद।
कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद?

ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने जानी?
बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी॥

किये दूध के कुल्ले मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया।
किलकारी किल्लोल मचाकर सूना घर आबाद किया॥

रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे।
बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे॥

मैं रोई, माँ काम छोड़कर आईं, मुझको उठा लिया।
झाड़-पोंछ कर चूम-चूम कर गीले गालों को सुखा दिया॥

दादा ने चंदा दिखलाया नेत्र नीर-युत दमक उठे।
धुली हुई मुस्कान देख कर सबके चेहरे चमक उठे॥

वह सुख का साम्राज्य छोड़कर मैं मतवाली बड़ी हुई।
लुटी हुई, कुछ ठगी हुई-सी दौड़ द्वार पर खड़ी हुई॥

लाजभरी आँखें थीं मेरी मन में उमँग रँगीली थी।
तान रसीली थी कानों में चंचल छैल छबीली थी॥

दिल में एक चुभन-सी भी थी यह दुनिया अलबेली थी।
मन में एक पहेली थी मैं सब के बीच अकेली थी॥

मिला, खोजती थी जिसको हे बचपन! ठगा दिया तूने।
अरे! जवानी के फंदे में मुझको फँसा दिया तूने॥

सब गलियाँ उसकी भी देखीं उसकी खुशियाँ न्यारी हैं।
प्यारी, प्रीतम की रँग-रलियों की स्मृतियाँ भी प्यारी हैं॥

माना मैंने युवा-काल का जीवन खूब निराला है।
आकांक्षा, पुरुषार्थ, ज्ञान का उदय मोहनेवाला है॥

किंतु यहाँ झंझट है भारी युद्ध-क्षेत्र संसार बना।
चिंता के चक्कर में पड़कर जीवन भी है भार बना॥

आ जा बचपन! एक बार फिर दे दे अपनी निर्मल शांति।
व्याकुल व्यथा मिटानेवाली वह अपनी प्राकृत विश्रांति॥

वह भोली-सी मधुर सरलता वह प्यारा जीवन निष्पाप।
क्या आकर फिर मिटा सकेगा तू मेरे मन का संताप?

मैं बचपन को बुला रही थी बोल उठी बिटिया मेरी।
नंदन वन-सी फूल उठी यह छोटी-सी कुटिया मेरी॥

‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी मिट्टी खाकर आयी थी।
कुछ मुँह में कुछ लिये हाथ में मुझे खिलाने लायी थी॥

पुलक रहे थे अंग, दृगों में कौतुहल था छलक रहा।
मुँह पर थी आह्लाद-लालिमा विजय-गर्व था झलक रहा॥

मैंने पूछा ‘यह क्या लायी?’ बोल उठी वह ‘माँ, काओ’।
हुआ प्रफुल्लित हृदय खुशी से मैंने कहा – ‘तुम्हीं खाओ’॥

पाया मैंने बचपन फिर से बचपन बेटी बन आया।
उसकी मंजुल मूर्ति देखकर मुझ में नवजीवन आया॥

मैं भी उसके साथ खेलती खाती हूँ, तुतलाती हूँ।
मिलकर उसके साथ स्वयं मैं भी बच्ची बन जाती हूँ॥

जिसे खोजती थी बरसों से अब जाकर उसको पाया।
भाग गया था मुझे छोड़कर वह बचपन फिर से आया॥

8. एक कौवा प्यासा था : हिन्दी कविता

तेज धूप से कौवा प्यासा,
एक कौवा प्यासा था
पानी की थी कहीं न आशा।
एक घड़े में थोड़ा पानी ,
देख हुई उसको हैरानी।

कुछ सोचा फिर लाया कंकड़
लगा डालने एक एक कर।
ज्यों ज्यों कंकड़ पड़ता जाता ,
त्यों त्यों पानी चढ़ता जाता।

ऊपर तक पानी चढ़ आया ,
मेहनत का फल उसने आया।
पानी पीकर प्यास बुझाई ,
मेहनत का फल है सुखदायी।

9. नील परी : हिन्दी कविता

आसमान से हँसती-गाती
नील परी भू पर आती है,
आकर के नन्ही बगिया को
खुशबू से यह भर जाती है।

जादूगर-सी छड़ी लिए है
बैठी बच्चों के सिरहाने,
इसके आते ही फूलों से
झरने लगते मीठे गाने।

इसकी मुसकानें मोती हैं
और चाँद है इसकी बिंदिया,
बच्चे इसको खूब जानते-
कहते हैं-लो आई निंदिया!

10. गुड़ियाघर : हिन्दी कविता

गुड़ियाघर, यह गुड़ियाघर,
लगता अम्माँ, कितना सुंदर!

यहाँ लगा है किस्म-किस्म के
रंगों का एक मेला,
कितनी मस्ती, चहल-पहल है
कोई नहीं अकेला।
गुड़िया गुड्डे देश-देश के
बुला रहे हैं भीतर!

यह जापानी गुड़िया हरदम
मुसकाती रहती है,
मगर फ्रांस से आई गुड़िया
गुस्से में लगती है।
इंगलिस्तानी गुड्डा इक
देख रहा है बिटर-बिटर!

कितना अच्छा चीनी बच्चा
चौड़ा हैट लगाए,
एक आदिवासी बालक है
तीर-कमान उठाए।
घास-फूस, तिनकों का देखो
बना हुआ है बढ़िया घर!

Yeh Bhi Pade…

To dosto kesi lagi aapko yeh kavitaye हिन्दी कविता बच्चों के लिए – Bachon ki Poem in Hindi hame comments kar ke jaroor bataye or is हिन्दी कविताएँ ki post ko apne dosto ke sath share karna na bhule.

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