कूलॉम का नियम क्या है ? – Coulomb’s law In Hindi ( Kulam Ka Niyam )

Hello Friends, Aaj ki is post me hum Kulam Ka Niyam kya hai, kise kehte hai iski paribhasha, formula or iska satyapan karege jo aapko puri trh se samaj me aa jayega kulam ka niyam ki simaye kya hai iske bare mai bhi aapko batane wala hu to chaliye suru karte hai.

कूलॉम का नियम ( Coulomb’s law in Hindi )

प्रयोगों द्वारा पता चलता है कि किन्हीं भी दो आवेशित वस्तुओं के बीच बल कार्य करता है। समान प्रकृति के आवेशों के बीच प्रतिकर्षण बल तथा विपरीत प्रकृति के आवेशों के बीच आकर्षण बल कार्य करता है। कूलॉम ने सन् 1785 में दो आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल के सम्बंध में नियम दिया, जिसे कुलॉम का नियम कहते हैं।

इसके अनुसार,

“दो बिन्दु आवेशों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस बल की दिशा दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में होती है।”

coulomb's law

इस प्रकार यदि बिन्दु आवेश q1 व q2 एक दूसरे से r दूरी पर स्थित हों, तो उनके बीच कार्य करने वाला बल kulam ka niyam या

kulam law in hindi

जिसमे k एक नियतांक है  k का मान निम्न दो बातो पर निर्भर करता है

(i) आवेशों के बीच के माध्यम पर तथा

(ii) मात्रकों की पद्धति पर |

S.I. पद्धति में आवेश का मात्रक कूलाम है इस पद्धति में सुविधा के लिए

kulam ke niyam ke sutra

जिसमे ε माध्यम की विधुतशीलता () है निर्वात की विधुतशीलता को ε० ( एपसायनल नॉट ) से प्रकट करते है, यह एक सार्वत्रिक नियतांक है इसका मान
ε० = 8.854*(10)^-12 कूलाम2 /न्यूटन – मीटर2 होता है।

तो दोस्तों यह था कूलॉम का नियम क्या है ? – Coulomb’s law In Hindi ( Kulam Ka Niyam ) आशा करता हूँ की आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी अगर आपको इस नियम से रिलेटेड कुछ भी पूछना हो तो हमें कमेंट कर के जरूर बताये और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना भूले ।

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